भूल नहीं मैं पा रहा उस आवाज को
जो सुना था मैंने कल रात को ।
जीवन को जो मेरे मधुर बना गयी
याद कर रहा हूँ उस मिठास को ।
अनहोनी बात नहीं ये सच है
सुन रहा हूँ अब भी मैं उस झंकार को ।
मन मेरा अब तृप्त हुआ, बस तृप्त हुआ
सुनकर उस सुर को उस ताल को ।
Tuesday, July 14, 2009
Subscribe to:
Comments (Atom)