भूल नहीं मैं पा रहा उस आवाज को
जो सुना था मैंने कल रात को ।
जीवन को जो मेरे मधुर बना गयी
याद कर रहा हूँ उस मिठास को ।
अनहोनी बात नहीं ये सच है
सुन रहा हूँ अब भी मैं उस झंकार को ।
मन मेरा अब तृप्त हुआ, बस तृप्त हुआ
सुनकर उस सुर को उस ताल को ।
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कई बातें सामने होते हुये भी दिखाई नहीं पडती मगर किसी बात को दूर होते हुये भी इन्सान केवल महसूस करके उसके होने का एहसास पा लेता है सुन्दर रचनासंवेदना को सँजोये हुये आशीर्वाद्
ReplyDeletebehad khubsurat
ReplyDeletebahut hi sundar baat kahi hai ......ek ek panktiyan nagine hai
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